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सजग नहीं सामाजिक संगठन, लोगों में भी जागरूकता का अभाव

 सोनीपत: शहर की गली-मोहल्ले में पनपते आवारा कुत्तों के आतंक पर प्रशासन व नगर निगम के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठन भी उदासीन बने हुए हैं। आमतौर पर जब किसी मुद्दे पर विभाग या अधिकारी गंभीर न हों तो सामाजिक संगठन एक बेहतर दबाव समूह के रूप में सामने आते हैं। मगर शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर लगाम लगाने व इस दिशा में कोई काम करने के मामले में तमाम एनजीओ व सगंठन भी मुखर नहीं हो सके हैं।

आवारा कुत्तों की पहुंच महज गली-मोहल्लों तक नहीं है। वह खेल के मैदान, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा से लेकर तमाम सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से दिखते हैं। चाहे सरकारी अस्पताल हो या किसी बड़े अधिकारी का दफ्तर कुत्ते टहलते मिल ही जाते हैं। यह बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की इमारत व दफ्तर तक घुसने की हिम्मत रखते हैं। लघु सचिवालय परिसर के अंदर ही कई कुत्तों के झुंड के झुंड बैठे रहते हैं।

कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि रात में आसपास की गलियों के कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं। इस दौरान एक जगह के कुत्तों का दूसरे क्षेत्र के कुत्तों से टकराव भी होता रहता है। कई बार तो देर रात तक भौंकने की आवाज आती रहती है। लोग इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा समझकर कोई शिकायत या कदम नहीं उठाते और फिर किसी दिन इन लोगों को भी शिकार होना पड़ता है। गढ़ी घसीटा में दर्जी की दुकान चलाने वाले नीरज मुढाल ने बताया कि उनके पड़ोस में आवारा कुत्ते कई बार ¨हसक होकर लोगों को काट चुके हैं। इसके बावजूद आज तक कभी किसी व्यक्ति ने इसकी शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि लोग इतने सजग नहीं है और उन्हें यह भी नहीं पता होता कि इसकी शिकायत कहां करें