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शहर में नहीं होता कूड़ा निस्तारण, यहां से उठाकर ऊंटलौदा में डाल देते हैं कूड़ा

झज्जर : करीब 55 हजार की आबादी वाले झज्जर शहर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था न हो पाना स्वच्छ सर्वेक्षण में भी आड़े आ गई। स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए बुधवार को नगर पालिका कार्यालय में रिकार्ड के जांच के लिए आई टीम में बृहस्पतिवार को जब नपा के अधिकारियों से पूछा कि बताए आपके शहर से निकलने वाले कूड़े का आप कैसे निस्तारण कर रहे हैं। उससे किस प्रकार की खाद तैयार कर रहे हैं, नगर पालिका के अधिकारियों से इसका जवाब भी नहीं बन पाया। अधिकारियों ने कहा कि म्हारे शहर में कूड़े का निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां से कूड़ा उठा कर ऊंटलौधा गांव के पास डाल देते हैं। कूड़ा निस्तारण के लिए अनेक बार प्रयास किए गए हैं। लेकिन इसके लिए कोई प्लाट आदि शहर के आसपास है नहीं, कोसली रोड पर डं¨पग प्वाइंट बनाया गया है। यहां से कूड़े को गाड़ियों व ट्रॉलियों में लोड कर ऊंटलौधा गांव में नगर पालिका की तरफ से खरीदी गई करीब आठ एकड़ जमीन में डाला दिया जाता है।

पिछले कई वर्षो से कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नही हो पा रही है। झज्जर नगरपालिका को शहर के कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन खरीदने के लिए कुछ वर्ष पूर्व सरकार की तरफ से ढाई करोड़ रुपये दिए गए थे। लेकिन जहां भी नगर पालिका ने इसके लिए जमीन तलाशने की कोशिश की वहीं उसे निराशा ही हाथ लगी और योजना अधर में लटक गई। उसके बाद ऊंटलौधा ग्राम पंचायत ने नगर पालिका को जमीन उपलब्ध करवाई थी। अब शहर के कूड़े को तो वहां पर ले जाया जा रहा है। लेकिन उसका निस्तारण कैसे किया जाए इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही है। यह व्यवस्था न होने से स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत अंक प्राप्त नहीं कर पाए।

इसके बाद सफाई कर्मचारियों व अधिकारियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षणों के बारे में भी जानकारी एकत्रित की गई। टीम ने समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले प्रशिक्षण शिविरों में किन लोगों ने शिरकत की है इसका रिकार्ड भी नपा से लिया है। स्कूलों में स्वच्छता के प्रति कितने जागरूकता कार्यक्रम किए गए हैं। शहर में कितने घरों में नगर पालिका की टीमों ने लोगों को जागरूक किया है।