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शहरी व ग्रामीण स्तर पर चले आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान

नूंह : जिले में कोई शहर और गांव ऐसा नहीं जहां आवारा कुत्तों का आतंक ना हो। लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए आज तक जिला प्रशासन व नगर पालिका ने कोई अभियान नहीं चलाया। इससे इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।

विभागीय विशेषज्ञों की मानें तो आवारा कुत्तों की संख्या को बढ़ने से रोकने के लिए उनकी नसबंदी होनी जरूरी है। केरल सहित दूसरे राज्यों में आवारा कुत्तों को मार दिया जाता है जो कि कोई ठोस उपाय नहीं है। कुत्तों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए उनकी नसबंदी होनी जरूरी है। लेकिन यह केवल जिला प्रशासन और नगर पालिका के प्रयासों से ही संभव हो सकता है। वेटनरी विभाग के डा. जितेंद्र ने बताया कि सिक्किम एक ऐसा राज्य है जहां आवारा कुत्तों की कोई समस्या नहीं है। वहां की सरकार और कई सामाजिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर इस समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया है। हरियाणा में भी सिक्किम जैसी योजनाएं चलाकर आवारा कुत्तों से निजात पाई जा सकती है।

इसमें कई सामाजिक संस्थाओं को भी साथ लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में कुत्तों की नसबंदी के पर्याप्त उपकरण नहीं हैं। जिससे यहां उनकी नसबंदी नहीं की जा सकती। सरकार को सभी पशु अस्पतालों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के पर्याप्त उपकरण मुहैया कराने चाहिए। इसके साथ-साथ एक स्थान भी निर्धारित किया जाना चाहिए, जहां कुत्तों की नसबंदी की जा सके।