News Description
हंसते रहिये, मुस्कराते रहिये का संदेश देते हुए मास्टर महेंद्र ने खूब जमाया रंग

झज्जर : चिकित्सकों का मानना कि रोजाना कम से कम 15 मिनट की हंसी आपको पूरे दिन मानसिक तनाव और कई प्रकार की बीमारियों से निजात दिला सकती है। हंसी का अपने आप में विशेष महत्व है। हंसी खुद के लिए भी और उनके लिए भी बहुत फायदेमंद है, जो आपको हंसता हुआ देखते हैं। वैसे तो रोज ही हंसना चाहिए। लेकिन अगर मौका खास हो तो यहां चूकना भी नहीं चाहिए। अक्सर कहां जाता है कि हंसने के लिए पैसा थोड़े ही नहीं लगता है। बस इन्हीं विचारों को केंद्र में रखते हुए दैनिक जागरण की ओर से बुधवार को महाराजा अग्रसेन महिला महाविद्यालय में विश्व हास्य दिवस के मौके पर एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हंसते रहिये, मुस्कराते रहिये थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में खास प्रस्तुति राष्ट्रीय कवि मास्टर महेंद्र द्वारा दी गई। जिसकी अध्यक्षता प्राचार्या डा. साधना गुप्ता ने की। जबकि खास अतिथि के रूप में संस्कारम पब्लिक स्कूल के चेयरमेन महिपाल मौजूद रहें। कार्यक्रम में मंच संचालन का कार्य डा. नीरू रोहिल्ला ने किया। व्यवस्था के स्तर पर सहयोग डा. तितिक्षा एवं डा. स्वाति ने किया। इस मौके पर महाविद्यालय का पूरा स्टॉफ भी खास तौर पर मौजूद रहा।

छात्रा राशि ने ठेठ हरियाणवी अंदाज में इस बेटी ने ए ले रे सुनाया। पांच मिनट की ही प्रस्तुति को विशेष अंदाज में रखते हुए राशि ने संदेश दिया कि हम सभी को अपने भीतर छिपे हुए हुनर को निखारने का मौका देना चाहिए। डा. नीरू रोहिल्ला ने छात्रा राशि के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए बताया कि इस हुनरमंद छात्रा ने इंटर यूनिवर्सिटी तक की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए संस्थान का नाम रोशन करने का काम किया है।

हंसी और हंसने का मतलब समझाया

अपने चिर-परिचित अंदाज में जब मा. महेंद्र ने काव्य पाठ शुरू किया तो पहली ही बात से माहौल जमता हुआ दिखाई दिया। चुटकुला और व्यंग्य में अंतर समझाते हुए उन्होंने दोनों ही विषयों से जुड़ी हुई प्रस्तुति यहां पर दी। बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ सहित समाज में फैल रही कुरीतियों को दूर करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हरियाणवी काव्य पाठ किया। जिसे यहां पर उपस्थित सभी ने खूब सराहा। माहौल ऐसा जमां कि करीब एक घंटा तक मा. महेंद्र ने हंसी और हंसने का मतलब भी समझाने का काम किया। उपस्थित छात्राओं के अलावा स्टॉफ के सदस्यों ने इस मौके पर हंसी मजाक का खूब आनंद उठाया। हंसी मजाक में ही अपनी बात रखते हुए मा. महेंद्र ने कहा कि आपाधापी के युग में मनुष्य सुबह से शाम तक हम अवसाद में रहते है। अवसाद के कारण शारीरिक-मानसिक बीमारियां लगी रहती हैं। फिर आज मनुष्य का अहं भी बहुत बढ़ गया है, उसकी आवश्यकताएं बढ़ गई हैं। जब आवश्यकताएं पूर्ण नहीं होतीं या अहं को चोट लगती है तो उसे बहुत क्रोध आता है। क्रोध की मात्रा के अनुसार ही उसका असर रहता है- 4 घंटे, 8 घंटे, 12 घंटे। ऐसे में आनंद प्रदान करने वाली घटनाओं का मनन करने मात्र से मन पर काबू पाने में मदद मिलती है। इसलिए अच्छी बातों से जुड़े हुए अनुभवों को हमेशा संजो कर रखना चाहिए।

मनोविज्ञान विषय की विशेषज्ञ एवं प्राचार्या डा. साधना गुप्ता ने कहा कि हंसना अपने आप में एक बहुत ही बेहतरीन चिकित्सा है। हंसी माइंड को रिलेक्स करने के साथ- साथ पूरे वातावरण को खुशमिजाज बनाती है। इससे दूसरों को भी पॉजीटिव एनर्जी मिलती है और डिप्रेशन कम होता है। डिप्रेशन के मरीजों को साइक्लोजिस्ट भी लॉफ्टर थेरेपी की सलाह देते हैं। हंसने से ब्रेन की पिटयूट्री और थाइमस ग्रंथि स्ट्रांग बनती है। इससे तनाव में कमी और याददाश्त में वृद्धि होती है। हास्य योग से चेहरे पर कभी झुर्रियां नही पड़ती साथ ही साथ आपकी फेस मसल्स मजबूत होती हैं।