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संघ के व्यक्ति में अगर योग्यता है तो वह उच्च पद भी हो सकता है काबिज

हिसार : प्रदेश सरकार योग्यता के आधार पर नौकरियां दे रही है। चौटाला और हुड्डा के कार्यकाल में सिफारिश वालों को ही उच्च पदों पर नौकरी दी जाती थी। अगर उन्हें पता चल जाता था कि यह व्यक्ति संघ की विचारधारा से जुड़ा हुआ है तो उन्हें योग्य होते हुए भी नौकरी पर नहीं रखा जाता था। मगर इस सरकार में योग्यता के पैमाने पर ही नौकरी दी जा रही है चाहे वह किसी भी विचारधारा का क्यों न हो। अगर व्यक्ति योग्य है और संघ की विचारधारा का है और सरकार उसे नौकरी दे रही है तो इसमें गलत क्या है। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीनिवास शर्मा ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि एक विचारधारा को व्यक्ति की प्रगति में बाधक नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि हुड्डा और चौटाला सरकार में नौकरियां किस प्रकार बांटी जाती थी यह जगजाहिर है। प्रदेश का सौभाग्य है कि एक ईमानदार नेतृत्व वाले व्यक्ति के हाथ में सत्ता की बागडोर है। वंशवाद की राजनीति को प्रदेश की जनता सिरे से नकार चुकी है। उन्होंने बताया कि 2 से 4 फरवरी को हिसार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन होने जा रहा है। इसमें छात्रों के हित को देखते हुए कई रेजुलेशन पास किए जाएंगे। इस अधिवेशन में एबीवीपी के प्रदेश नेता, कैंपस नेता, स्टेट सेंट्रल वर्किंग कमेटी की सदस्य मोनिका चौधरी जैसे छात्र नेता भाग लेंगे।

छात्रसंघ चुनाव कराने में अब तक एबीवीपी असफल रही?

- एबीवीपी प्रदेश में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में है। सरकार इसके लिए प्रयास भी कर रही है मगर वे अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। एबीवीपी राष्ट्रीय अधिवेशन पर रेजुलेशन लानी जा रही है। अगले सत्र में हम चुनाव करवाकर रहेंगे।

दिग्विजय चौटाला भी छात्रसंघ चुनाव के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं?

- चौटाला और कांग्रेस की सरकार ने हमेशा वंशवाद की राजनीति की हैं। अगर यह पार्टी प्रयास करती तो इनके शासन काल में ही छात्रसंघ चुनाव हो जाते। चौटाला ने छह साल शासन किया और हुड्डा ने 10 साल राज किया तब क्यों नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव। ये पार्टी वंशवाद से ग्रस्त है कोई सामान्य घर का युवा आगे न बढ़े इस लिए ये चुनाव कराने से डरते हैं।

आपको नहीं लगता है छात्रसंघ चुनाव से शिक्षण संस्थानों में माहौल बिगड़ेगा?

-मैं इस बात से इत्तफाक नहीं रखता। छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से सरकार अपने फैसले छात्रों पर थोपती है। वंशवाद की राजनीति जन्म लेती है और शिक्षा का बाजारीकरण शुरू हो गया है। इसे छात्रसंघ चुनावों से ही रोका जा सकता है। झगड़े तो पंचायत और विधानसभा चुनाव में भी होते हैं मगर सरकार एक व्यवस्था बनाती है कि झगड़े न हो। ऐसा ही प्रयास सरकार को इसके लिए करने चाहिए।

हिमाचल में एबीवीपी के कई नेता विधायक बने हैं यहां भी ऐसा कुछ दिखेगा?

- भाजपा में अधिकतर लोग या तो संघ से भाजपा में जाते हैं या फिर एबीवीपी में छात्र राजनीति से। हिमाचल में यह रहा कि इस बार काफी व्यक्ति ऐसे चुने गए हैं जो छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। युवाओं के हाथ में बागडोर आएगी तो हालात तेजी से बदलते हैं। हरियाणा में भी ऐसा देखने को मिले मैं भी यही चाहता हूं।

क्या देश की राजनीति तेजी से बदल रही है?

- देश के खिलाफ बोलने वाले और देश-विरोधी नारे लगाने वाले सक्रिय हो रहे हैं। एबीवीपी इसके लिए अभियान शुरू करने जा रही है। एबीवीपी कैंपसों में जाकर राष्ट्रवाद के साथ युवाओं को जोड़ेगी। हम एससी, एसटी और ओबीसी हॉस्टलों में राष्ट्रवाद के विषय को लेकर जाएंगे और वहां संपर्क बढ़ाएंगे।