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फाइलों में ही घूमती रही खेल नीति

गुरुग्राम शुक्रवार को प्रदेश की नई खेल नीति अपने तीन वर्ष पूरे कर रही है, लेकिन खेल नीति तीन वर्ष में फाइलों से निकलकर जमीनी स्तर तक नहीं पहुंची। इन तीन वर्षों में खेल का सूखा समाप्त नहीं हुआ। स्वामी विवेकानंद जयंती पर 12 जनवरी 2015 को जब प्रदेश की खेल नीति लागू हुई, तो सभी ने सरहाना की थी। अगर प्रदेश की खेल नीति जमीनी स्तर पर लागू होती, तो ऐसा पहली बार होता कि सरकारी खर्च पर ओलंपियन खिलाड़ी तैयार होता। लेकिन नन्हें बच्चों के तीन वर्ष इंतजार में कब निकल गए पता ही नहीं चला। नई खेल नीति में खिलाड़ियों के लिए इनाम बढ़ाया गया था और एक ही स्कीम लागू हो पाई है। जिसमें खिलाड़ियों को इनाम में बढ़ाई गई राशि मिली है। नई खेल नीति के तहत सुविधा देने के चक्कर में सभी खेल नर्सरी, हास्टल बंद कर दिए गए थे और स्कूलों में खेल नर्सरी शुरू करने की प्ला¨नग बनाई गई, जो अधूरी सिरे चढ़ पाई है।

नौकरी देने का प्रावधान :

राज्य स्तर पर पदक जीतने वालों से लेकर राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नौकरी देने का वायदा था, लेकिन अभी हालात यह है कि जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी है, जिन्होंने 2014 एशियन खेलों में पदक जीते थे और रियो ओलंपिक 2016 खेलने के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का नौकरी मिलने का इंतजार समाप्त नहीं हुआ है।

खेल नीति के खास कार्य :

खिलाड़ियों के स्वास्थ्य बीमा, उभरते खिलाड़ियों को विदेश में प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों का भी विदेशों में प्रशिक्षण से लेकर प्रशिक्षकों के सेंटर पर खिलाड़ियों की हाजरी मशीन से लगाने का प्लान था। ताकि सभी प्रशिक्षक सेंटर चलाने के लिए मजबूर हो जाएं। खेलों के मांग व प्रसिद्धी को देखते हुए खेलों की वहीं सुविधा देने का प्लान शामिल था। ज्यादा से ज्यादा अखाड़े और उन खेलों के ज्यादा सेंटर स्थापित किए जांएगे जहां पर खेलों को ज्यादा रुझान होगा। साईकिल रेस ट्रैक से लेकर शू¨टग सेंटर बनाए जाएंगे। प्रदेश के कई जिला में ओलंपिक स्तर के स्वि¨मग पूल बनाए जाएंगे। बैड¨मटन, लॉन टेनिस, तीरंदाजी, टेबल टेनिस, गोल्फ के सेंटर शुरू किए जाएंगे। जिमनेजियम हाल, नए हाकी एस्ट्रो टर्फ, एथलेटिक ¨सथेटिक ट्रैक बनाए जाएंगे। ऐसे ही अन्य प्ला¨नग थी, जिसमें सुविधाएं देनी थी, लेकिन प्रदेश के किसी एक-दो जिला का छोड़ दें, तो किसी में कोई काम नहीं हुआ।

युवाओं की खेलों में रुचि जानी:

2015 में प्रदेश खेल विभाग ने सर्वे किया था कि प्रदेश के किन जिला में युवाओं की किन खेलों की ज्यादा रुचि है। खेल विभाग का प्लान था कि उसी हिसाब से प्रदेश के जिलों में खेलों की सुविधा दी जाएगी। ताकि 2018 एशियन व 2020 टोक्यो ओलंपिक खेलों तक प्रदेश के नए खिलाड़ी तेयार किए जा सके, लेकिन प्रदेश में ऐसी प्ला¨नग कागजी ही बनकर रही।

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ऐसा नहीं है खेल नीति पर काम नहीं हुआ। प्रदेश के सभी जिला में 20-20 खेल नर्सरी खोली जा चुकी हैं। खिलाड़ी जाने लगे हैं। जहां जहां सुविधाओं की मांग है वहां पर मांग पूरी करने के लिए अलग अलग विभाग से सहयोग लिया जा रहा है। हमनें नए प्रशिक्षक भर्ती किए हैं और तैनाती दे रहे हैं। अगले वर्ष तक देखेंगे कि खेल में बड़ी सुविधाए पूरी होगी।