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प्रद्युम्न हत्याकांड: आरोपी छात्र की जमानत अर्जी खारिज

गुरुग्राम: प्रद्युम्न हत्याकांड के आरोपी छात्र की जमानत अर्जी सोमवार को बाल न्यायालय ने खारिज कर दी। साथ ही जमानत की अर्जी को आधारहीन बताते हुए बचाव पक्ष के ऊपर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आधारहीन अर्जी दाखिल कर न्यायालय का बहुमूल्य समय बर्बाद किया गया। इससे पहले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा भी आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।

आरोपी की जमानत पर शनिवार को बहस की गई थी। बहस के दौरान बचाव पक्ष ने एक एक्ट का हवाला देते हुए दलील दी थी कि यदि जुवेनाइल के मामले में 30 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है, तो आरोपी जमानत पाने का हकदार हो जाता है। इस पर पीड़ित पक्ष ने दलील दी कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी को वयस्क के दायरे में माना है। साथ ही जिस तरीके का अपराध है वह संगीन अपराधों की श्रेणी में आता है। ऐसे मामले में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है। इसके साथ ही न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सोमवार को न्यायालय ने सख्त टिप्पणी के साथ जुर्माना लगाते हुए अर्जी खारिज कर दी। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने बताया कि जिस आधार पर बाल न्यायालय ने अर्जी खारिज की है, उसी आधार पर बोर्ड द्वारा अर्जी खारिज की गई थी। प्रद्युम्न की हत्या संगीन अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे मामलों में चार्जशीट 90 दिनों के भीतर दाखिल करने का प्रावधान है। 90 दिन आरोपी की गिरफ्तारी से माना जाता है। इस तरह सीबीआइ के पास सात फरवरी तक का समय है। बता दें कि गत वर्ष आठ सितंबर को रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की स्कूल के ही बाथरूम में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। मामले में सीबीआइ ने स्कूल के ही 11वीं कक्षा के छात्र को आरोपी बनाया है। वह न्यायिक हिरासत में फरीदाबाद स्थित बाल सुधार गृह में है। आगे मामले में अब 22 जनवरी को सीबीआइ द्वारा आरोपी के ¨फगर ¨प्रट्स लेने एवं रिमांड के दौरान निर्धारित समय से अधिक समय तक पूछताछ की अनुमति के बारे में सुनवाई होगी।

न्यायालय के ऊपर पूरा भरोसा

बाल न्यायालय द्वारा आरोपी की अर्जी खारिज करने के बाद प्रद्युम्न के पिता वरुणचंद ठाकुर ने कहा कि उन्हें न्यायालय के ऊपर पूरा भरोसा है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनका संघर्ष बेकार नहीं जाएगा। व्यवस्था में सुधार होगा। स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम बेहतर होगा। उनका बेटा अब लौटकर नहीं आ सकता। दूसरा बच्चा उनके बेटे की तरह दुनिया से न जाए, इसके लिए ही संघर्ष कर रहे हैं।