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ओडीएफ तो ठीक मगर सफाई व्यवस्था न कहीं बिगाड़ दे खेल

फतेहाबाद: स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम एक दिन बाद शहर में आ रही है। नगरपरिषद के अधिकारी भी जी जान से जुट गए हैं कि उन्हें बेहतर रैंकिंग मिले। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर शहर को अच्छे अंक मिल सकते हैं। पूरा शहर खुले में शौच मुक्त हो चुका है। ऐसे में, 130 अंकों में अच्छी रै¨कग हासिल हो सकती है। लेकिन स्वच्छता नगरपरिषद के कार्यों पर पानी फेर सकता है। शहर में सार्वजनिक शौचालय तो कई बनाए गए हैं लेकिन उनकी सफाई न होने के कारण रैं¨कग में कमी आ सकती है। अधिकारी भी इन शौचालयों को साफ करने में लगे हुए हैं। लेकिन अब दशा देख ऐसा लग रहा है कि अंकों में कटौती होनी भी निश्चित है। निगेटिव मार्किंग सकते में डाल सकती है।

--खुले में शौचमुक्त के अंक 110

प्रशासन पहले ही पूरे जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित कर चुका है। इसमें शहर भी शामिल है। स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम अधिकारियों ने खुले में शौच मुक्त करने के दस्तावेज भी जुटाएगी। इसके बाद इस मुद्दे पर अंक शहर को मिलेंगे। इसके बाद स्वच्छता पर भी नजर डालेगी। शौचालयों की हालत ठीक नहीं मिली तो उनके नंबर भी काट लिए जाएंगे।

--सामुदायिक शौचालय अंक : 56

स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम शहर का निरीक्षण करेंगी। नगरपरिषद द्वार शहर में बनाए गए शौचालयों की स्थिति की जांच करेगी। जिसमें शौचालय में उपलब्ध सीटें, शौचालयों की संख्या, ये शौचालय निश्शुल्क है या शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा इन शौचालय की देखरेख खुद कर रहे हैं या फिर कोई निजी संगठन कर रहा है। अगर इन प्रश्नों के उत्तर टीम को मिल गए तो शहर को अंक भी अच्छे मिलेंगे।

--हकीकत

नगरपरिषद ने शहर में दर्जन भर से अधिक सार्वजनिक शौचालय बना रखे है। लेकिन इनकी देखरेख समय पर न होने के कारण उनकी स्थिति खराब पड़ी हुई है। एक दो शौचालयों को छोड़ दे तो कई शौचालयों में पानी तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में टीम अगर इन शौचालय का निरीक्षण करती है तो नंबर कट सकते हैं। पुराना बस स्टैंड व नए बस स्टैंड के शौचालयों की स्थिति ही ठीक है।

--टैंक खाली करने वाले ऑपरेटर: अंक 42

सर्वेक्षण टीम के अधिकारी यही भी जांच करेंगे कि जो शौचालय सीवरेज लाइन से नहीं जुड़े हुए है उनके टैंक खाली करने की क्या व्यवस्था है। कई जिलों में सकर मशीन होती है जिसकी सहायता से इन टैंकों को खाली किया जाता ताकि गंदगी न फैले। अगर फतेहाबाद शहर में यह सुविधा मिली तो उसे 52 नंबर मिल सकते है। इसके अलावा पंजीकृत ऑपरेटर कितने जिसको यह जिम्मेदारी दे रखी है।

--हकीकत

टैंक खाली करने के लिए स्थानीय नगरपरिषद के पास सकर मशीन तक नहीं है। इसके मुकाबले टोहाना नगरपरिषद के पास मशीन है। इसके अलावा किसी भी कंपनी को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे में ओडीएफ के इस प्वाइंट को शहर की रै¨कग पर असर पड़ेगा।