News Description
रेडक्रॉस की अनदेखी ने दिव्यांगों का बढ़ाया दर्द, मुफ्त के कृत्रिम अंग बनाना किया बंद

रोहतक: दिव्यांगों के दर्द को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की तमाम योजनाएं चल रही हैं। रेडक्रॉस रोहतक ने इसके विपरीत हालात पैदा कर दिए हैं। रेडक्रॉस कुछ साल पहले तक दिव्यांगों के लिए मुफ्त में कृत्रिम अंग तैयार करता था। बजट का बहाना और प्रशिक्षित स्टाफ का टोटा बताकर चार-पांच साल पहले कृत्रिम अंग बनाने का काम ही रोक दिया।

तमाम हादसों से लेकर पोलियो की चपेट में आने वालों मुसीबत बढ़ गई है। रेडक्रॉस में मुफ्त कृत्रिम अंग मिलना ही पूरी तरह से बंद हो गए। अव्यवस्थाओं से बेहाल दिव्यांगों को मजबूर होकर पीजीआइ से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके लिए भी दाम चुकाने पड़ रहे हैं। रेडक्रॉस के सूत्रों का कहना है कि कृत्रिम अंगों को बनाने के कार्य के लिए करीब दस लाख रुपये तक बजट चाहिए, लेकिन अफसरों ने डिमांड तक नहीं भेजी है।

रेडक्रॉस के सूत्रों का कहना है कि करीब तीन साल से लगातार दिव्यांग मुफ्त के कृत्रिम अंग पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। अभी तक करीब 250-300 आवेदक तक सीधे रेडक्रॉस में कृत्रिम अंग पाने के लिए नाम लिखवा चुके हैं। दूसरी ओर, यह भी दावे हैं कि तमाम लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें बिना नाम के कृत्रिम अंग मिल चुके हैं। मगर उनके कृत्रिम अंग फिट नहीं बैठ सके तो तमाम दिव्यांगों ने कृत्रिम अंग ही वापस लौटा दिए। फिलहाल अलमारियों में यह अंग भरे पड़े हैं।