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किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में विस्तार से बताना चाहिए-वीरेन्द्र सिंह

 धान हरियाणा की प्रमुख खाधान फसल है और हरियाणा ने धान का सर्वाधिक उत्पादन करके अनेक बार राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। इसलिए कृषि विभाग के अधिकारियों को गांव-गांव जाकर किसानों को जहां कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव के अनुसार कृषि लागत घटाने और धान का उत्पादन बढाने के लिए प्रेरित करना चाहिए वहीं किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में विस्तार से बताना चाहिए, ताकि खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके। 
यह आह्वान हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वीरेन्द्र सिंह ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनाज मण्डी कार्यालय में आयोजित बैठक को सम्बोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि धान की राष्ट्रीय स्तर पर औसत पैदावार 20 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर है। जो की इसकी क्षमता से काफी कम है, इसके प्रमुख कारण हैं-कीट एंव बीमारियां, बीज की गुणवता, गलत शस्य क्रियाएं और खरपतवार । किसानों का सबसे ज्यादा नुकसान खरपतवार और फसल में  लगने वाले रोगों के कारण होता है।
धान की फसल के प्रमुख खरपतवार तीन प्रकार के पाये जाते हैं,चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार संकरी पत्ती वाले खरपतवार ,मोथा कुल खरपतवार । किसानों को इन खरपतवारों की पहचान और इनसें होने वाले नुकसान के बारे जानना जरूरी है। न्होंने कहा कि धान की फसल में खरपतवारों की रोकथाम के लिए किसान निवारण विधि के अलावा यांत्रिक और रसायनिक विधि को भी अपना सकते हैं। इस विधि में वे क्रियाऐं शामिल है , जिनके द्वारा धान के खेत में खरपतवारों के प्रवेश को रोका जा सकता है, जैसे प्रमाणित बीजों का प्रयोग, अच्छी सड़ी गोबर की खाद , कम्पोस्ट खाद का प्रयोग, सिंचाई कि नालियों की सफाई एंव अच्छी तरह से तैयार की गई नर्सरी से पौध को रोपाई के लिए लगाना आदि।  खरपतवारों पर काबू पाने क ी यह एक सरल व प्रभावी विधि है।
किसान धान के खेतों से खरपतवारों को हाथ या खुरपी की सहायता से निकालते हैं। पैडीवीडर चलाकर खरपतवारों की रोकथाम की जा सकती है। सामान्यत: धान की फसल में दो निराई-गुड़ाई पहली बुआई/ रोपाई के 20-25 दिन बाद एंव दूसरी सामान्यत:40-45 दिन बाद करने से खरपतवारों प्रभावी नियन्त्रण किया जा सकता है। तथा फसल की पैदावार में काफी वृद्धी की जा सकती है।