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स्कूल में सजा न मिले इसलिए थामी थी स्टिक, अब तक जीत चुकी हैं कई मेडल

हिसार नियम और कायदे यूं तो किसी को भी मंजिल तक पहुंचने में हमेशा ही सहायक होते हैं। लेकिन कभी-कभी ये जीवन को पूरी तरह से बदलकर रख देते हैं। कुछ इसी तरह का जीता-जागता उदाहरण हैं झारखंड से हिसार पहुंचीं हॉकी खिलाड़ी दीप्ति कुल्लू। वह यहां सब जूनियर नेशनल वूमेन हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंची हैं। दीप्ति जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहां हॉकी खेलना अनिवार्य था, वरना विद्यार्थियों को सजा दी जाती थी। सजा के रूप में विद्यार्थियों से स्कूल में साफ-सफाई कराई जाती थी। सजा से बचने के लिए उन्हें भी खेलना पड़ता था। उन्हें खुद भी नहीं पता था कि स्कूल का नियम पूरी तरह से उनके जीवन को बदल देगा। सोमवार शाम को हिसार पहुंचीं दीप्ति ने दैनिक जागरण से खास बातचीत की।

झारखंड की सिमडेगा की रहने वाली दीप्ति कुल्लू का कहना है कि उसने आरसी मद विद्यालय करगागुड़ी सिमडेगा में पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, लेकिन उस स्कूल में हॉकी खेलना अनिवार्य था। स्कूल में सभी को अपने साथ हॉकी लेकर जाना होता था। आज भी उस स्कूल में हॉकी खेलने की परंपरा चली आ रही है। पांचवीं कक्षा पूरी होने के बाद दीप्ति का एसएस ग‌र्ल्स हॉकी सेंटर सिमडेगा में चयन हुआ। जहां वह नौवीं कक्षा की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। वह झारखंड की सब जूनियर नेशनल हॉकी टीम में मिड फिल्डर की भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में कई मेडल डाले हैं।

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वर्ष 2014 में खेलते समय दीप्ति को लगी थी चोट

दीप्ति का कहना है कि वर्ष 2014 में रांची में आयोजित स्कूली नेशनल हॉकी प्रतियोगिता के दौरान उन्हें नाक में ज्यादा चोट लगी थी। इस दौरान दीप्ति को काफी टांके भी आए थे। कुछ दिन ही दीप्ति ने आराम किया और फिर मैदान में उतरी। दीप्ति का कहना है कि वह गरीब परिवार से है। सरकार से मिलने वाली राशि से अन्य परिवार की तरह अपने परिवार को भी ऊंचा उठाना चाहती है।