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जगह की आड़ में प्राइवेट कंपनी को सौंप दी ईओ की सरकारी कोठी

अंबाला शहर कोठी सरकारी, काम प्राइवेट कंपनी का। अंबाला शहर नगर निगम अधिकारियों ने न केवल प्राइवेट कंपनी को काम करने के एवज में ठेका दिया है, बल्कि सुविधाओं भरी सरकारी कोठी में कंपनी का कार्यालय भी खोल दिया है। इस तरह जगह उपलब्ध कराने की आड़ में अधिकारियों ने कंपनी को ईओ की सरकारी कोठी दे दी। करीब आठ माह से इसी कोठी में कंपनी का कार्यालय चल रहा है। यहां रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन व बार को¨डग लगाने का काम चल रहा है। मजेदार बात यह है कि जिस ईओ की आधिकारिक रूप से यह कोठी है वह निगम कार्यालय शहर से करीब छह किलोमीटर दूर ई-मैक्स के क्वार्टर में निजी खर्च पर रहे हैं।

दरअसल, अंबाला शहर और छावनी नगर निगम के पूरे रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा रहा है। इसके अलावा नगर निगम के सभी करदाता के घर, दुकान व कार्यालय के बाहर प्रॉपर्टी आइडी के बार कोड लगाए जा रहे हैं। इस काम को करने के लिए जगह कंपनी को नगर निगम ने उपलब्ध करानी थी लेकिन पूरा सेटअप तैयार कर कंपनी को नगर निगम देगा यह कहीं भी शर्तो में नहीं है।

सरकारी को दोहरी चपत लगा रहे अधिकारी

प्राइवेट कंपनी को ईओ की सरकारी कोठी कार्यालय चलाने के लिए देने के कारण सरकारी पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ तो ईओ को एचआरए देना पड़ रहा है जोकि प्रति माह करीब तीन हजार रुपये पड़ता है दूसरी ओर कंपनी से एक रुपये भी रेंट के रूप में नहीं वसूला जा रहा। ईओ को सरकारी कोठी होते हुए प्राइवेट जगह पर रहना पड़ रहा है।

50 पैसे प्रति पेज के हिसाब से निगम दे रहा कंपनी को खर्च

नगर निगम के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए कंपनी को नगर निगम प्रति पेज 50 पैसे दे रही है। लाखों पन्नों को डिजिटल करना है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2017 से सारे रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है जोकि अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में सुविधाओं के साथ कई लाख रुपये कंपनी को इस काम के निगम देगा। बिजली का बिल भी निगम के अकाउंट से भी भरा जा रहा है। हालांकि यह हो सकता है बाद में उस राशि को कंपनी से ले लिया जाता हो।