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नौनिहालों के बचपन को संवार रही कल्याण समिति

कुरुक्षेत्र : बाल श्रम के बोझ के बचपन दबता जा रहा है। इसके कारण बच्चों का भविष्य बनने से पहले ही धूमिल हो जाता है। शहर की सैकड़ों दुकानों व चाय स्टालों पर बालश्रम आम बात हो गई है। श्रम को रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं, लेकिन पूरी तरह लागू न होने के कारण बच्चों पर मजदूरी कर रहे हैं। माता-पिता भी स्वयं बच्चों को श्रम की ओर धकेलते हैं।बाल कल्याण समिति ने बचपन को श्रम से मुक्ति दिलाने के लिए बीड़ा उठाया है। बच्चों को दुकानों से हटाकर शिक्षा की ओर अग्रसर कर रहा है। बाल मजदूरी रोकने के लिए कल्याण समिति द्वारा दुकानों पर छापेमारी की जा रही है। जिला बाल कल्याण समिति चेयरमैन वीरेंद्र काजल ने साप्ताहिक साक्षात्कार में बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2017-2018 में अब तक बाल श्रम व भीख मांगने वाले बच्चों को मुक्त कराया है।

सवाल : आपरेशन मुस्कान क्या है?

जवाब : आपरेशन मुस्कान केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा गुमशुदा बच्चों को ढूंढकर उसके माता-पिता से मिलाना है। वर्ष में दो बार मुस्कान आपरेशन चलाया जाता है। इसके लिए टीमें गठित की जाती हैं और पुलिस विभाग का विशेष सहयोग रहता है।

सवाल : समिति का क्या उद्देश्य है?

जवाब : महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा बाल अपराध, बाल शोषण व बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बाल कल्याण समिति की स्थापना की गई है। समिति का उद्देश्य बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण करना है। बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए समिति पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रही है।

सवाल : बच्चों को शिक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

जवाब : स्कूली शिक्षा से वंचित बच्चों का समिति द्वारा डाटा एकत्रित किया जाता है। समिति द्वारा बाल मजदूरी, भिक्षावृति व गुमशुदा मिले बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाता है। भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए टीम द्वारा सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर छापेमारी की जाती है।

सवाल : बच्चों में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जवाब : बच्चों में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए समिति द्वारा गठित टीम समय-समय पर छापेमारी करती है। समिति द्वारा संदिग्ध क्षेत्रों में स्थित मेडिकल स्टोरों पर भी छापेमारी की जाती है। बच्चों में नशा प्रवृत्ति न बढ़े इसको लेकर समिति पूरी तरह तत्पर है।

सवाल : बच्चों को गोद लेने की क्या प्रतिक्रिया है?

जवाब : बच्चों को गोद लेने के लिए भारत सरकार व हरियाणा सरकार द्वारा विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी व सीएआरए दो एजेंसियां बनाई गई है। जिनके तहत बच्चों को गोद दिलाया जाता है। बच्चा गोद लेने से पहले समिति आवेदक की पूरी जांच-पड़ताल की जाती है।

सवाल : बच्चों के पालन-पोषण को लेकर समिति की क्या योजना है?

जवाब : जिन बच्चों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उनको पालक परवरिश स्कीम के तहत 1500 रुपये प्रति बच्चा व प्रति माह भत्ता दिया जाता है। जो बच्चे अनाथ हैं तथा जो अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण यदि वे बच्चों का पालन-पोषण करने में समक्ष नहीं है, उनको आर्थिक सहायता योजना के तहत 2000 रुपये प्रति बच्चा सहायता दी जाती है। स्कीम के अंतर्गत दो बच्चों को ही इस स्कूल का लाभ दिया जाता है।

सवाल : पिछले वर्ष भिक्षावृत्ति के तहत कितने बच्चे पकड़े हैं?

जवाब : समिति की ओर से अप्रैल 2017 से लेकर अब तक विभिन्न श्रेणियों में 220 बच्चों को पकड़ा है। इनमें भिक्षावृत्ति, लापता, चाइल्ड लेबर शामिल हैं। 169 बच्चे उनके परिजनों को हवाले किया गया है। 12 लापता बच्चे परिजनों को मिलाया गया है।

सवाल : बाल श्रम को रोकने के लिए क्या कदम उठाया गया है?

जवाब : केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में बाल किशोर न्याय एक्ट में संशोधन किया है। एक्ट में संशोधन करने के उपरांत अगर कोई व्यक्ति बाल श्रम कराता है तो उसे तीन साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही बच्चे माता-पिता पर भी केस दर्ज किया जाता है।