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कागजों तक सिमटी पिनगवां को CHC का दर्जा देने की योजना

पुन्हाना : 8 वर्ष बाद भी उपमंडल के कस्बा पिनगवां की पीएचसी भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इसके कारण 8 वर्ष बाद भी पीएचसी से लगते 39 गांवों के लोगों के लिए पिनगवां पीएचसी को सीएचसी बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है।

कांग्रेस सरकार के बाद प्रदेश में बनी भाजपा सरकार से लोगों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार में उन्हें सीएचसी का लाभ जरूर मिल जाएगा, लेकिन भाजपा सरकार में भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। भाजपा सरकार में इतना काम जरूर हुआ है कि भवन निर्माण का कार्य नींव से उठकर आधे-अधूरे भवन तक पहुंच गया है।

बता दें कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा प्रदेश के पिछड़े जिलों में नूंह को 90वां जिला मानते हुए मल्टी सेक्ट्रोल विकास योजना के तहत पिनगवां पीएचसी को सीएचसी का दर्जा देकर 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर मेवात विकास अभिकरण को इस का कार्यभार सौंपा था और एजेंसी द्वारा इसके निर्माण का ठेका नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) कंपनी को दिया था। इस कंपनी ने भी योजना का काम सब ठेकेदार को दे दिया। इसके चलते निर्माण कार्य ठेकेदारों के बीच में ही फंसकर रह गया है लेकिन अब केंद्र और राज्य में भाजपा के सत्ता संभालने के बाद स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि अब भाजपा के कार्यकाल में लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए सीएचसी भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लोगों को सीएचसी का लाभ जरूर दिया जाएगा। लेकिन भाजपा सरकार के 3 वर्ष बीत जाने के बाद अब लोगों को नहीं लगता कि पिनगवां को सीएचसी का दर्जा भी मिल पाएगा।

पिनगवां सीएचसी बनने से पिनगवां की 15000 से अधिक आबादी समेत लगभग 39 गांवों की 1 लाख से अधिक आबादी प्रभावित हो रही है और लोगों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं स्टाफ के टोटे के चलते अब तो मेडिकल अफसर भी सप्ताह में मुश्किल से दो दिन बैठते हैं। पिनगवां के पूर्व सरपंच बिल्लू उर्फ संजय, सरपंच अजरून ¨सह, मेंबर पंचायत फकरूद्दीन, इब्राहिम चंदा पटेल, सुन्दर, आदि लोगों का कहना है पिछली सरकार के कार्यकाल में यह परियोजना केवल फाइलों तक ही सिमट कर रह गई है लेकिन भाजपा से इसे पूरे करने की उम्मीद है।