News Description
धूमधाम से मनाया गुरु गोबिंद ¨सह का प्रकाश पर्व

,भिवानी : नौ वर्ष की आयु में अपने पिता को कुर्बान करने वाले दसवें गुरु एवं सर्वस्यदानी, पिता गुरु गोबिंद ¨सह का अवतार गुरुपर्व सोमवार को गुरुद्वारा गुरु ¨सह सभा में बड़ी धूमधाम से मनाया। पुरानी देवसर चुंगी स्थित गुरुद्वारा ¨सह सभा के मुख्य ग्रंथी ने गुरुबाणी के माध्यम संदेश दिया। संगत की ओर से सरकार का धन्यवाद किया कि इस वर्ष सरकार ने श्री पटना साहिब तक ट्रेन के माध्यम से गुरु गो¨बद ¨सह जन्म स्थान के दर्शन करवाए। रामा मंडी बठिड़ा से पहुंचे रागी जत्था भाई गुरनाम ¨सह ने कीर्तन के माध्यम से संगतों को गुरुबाणी से प्रेरित करवाया। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी लाल¨सह ने बताया कि सिक्ख पंथ के दसवें गुरु गो¨वद ¨सह ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। उन्होंने अल्प आयु में ही कश्मीर के पंडितों के जनेऊ बचाने के लिए अपने पिता गुरु तेग बहादुर को धर्म के लिए कुर्बान होने के लिए प्रेरित किया तो उसके बाद अपने चारों पुत्रों व मां को धर्म के लिए न्योछावर कर दिया। जिनमें से दो पुत्रों जोरावर ¨सह व फतेह ¨सह को वजीन खान ने ¨जदा दिवारों में चिनवा दिया और दो पुत्र लड़ाई में लड़ते हुए शहीद हो गए थे। किसी कवि ने सहीं कहा है कि बात कहूं न अब की, बात कहूं न तब की, अगर न होते गुरु गोबिंद ¨सह तो सुन्नत होती सब की गुरुद्वारा ¨सह सभा की संगत ने हरियाणा सरकार का धन्यवाद करते हुए कि इस वर्ष 350 साला के समापन समारोह पर एक विशेष रेलगाड़ी चलाई। जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने गुरु गोबिंद ¨सह के जन्म स्थान श्री पटना साहिब के दर्शन किए । गुरुद्वारा ¨सह सभा देवसर चुंगी के प्रधान ज्ञान¨सह बागड़ी, लक्ष्मण ¨सह, महेन्द्र ¨सह, भागवंत कौर, राज¨सह, रमन ¨सह, इन्द्र मोहन ¨सह, सरदार महिमा ¨सह, बलदेव ¨सह, सरदार कृष्ण ¨सह, हर्ष, कमलदीप ¨सह, अमरजीत कौर, दया¨सह, मदनलाल मदान, जोगेन्द्र ¨सह, रमेश, चन्द्रप्रकाश, हरिप्रकाश, सोनू सहित अनेक श्रद्धालुओं ने लंगर में सेवा की।